Hasya Ras Ka Udaharan – हिंदी व्याकरण के अंदर अधिकतर अभ्यर्थियों को हास्य रस के उदाहरण को समझने में बहुत ही ज्यादा समस्या आती है आज के आर्टिकल में हम आपको ऐसे उदाहरण बताएंगे और ऐसी परिभाषा बताएंगे जो आपको बहुत ही आसानी से समझ में आ जाएगी। हास्य रस का उदाहरण अगर आपको आज तक समझ में नहीं आया है तो अब बहुत ही आसानी से समझ में आ जाएगा।
हिंदी व्याकरण में हास्य रस का अपना एक महत्वपूर्ण योगदान है और सबसे ज्यादा काव्य में इनका प्रयोग किया जाता है। अगर काव्य में इनका प्रयोग नहीं होता है तो उसमें रोचक तथ और सुंदरता नहीं आती है।
हास्य रस की परिभाषा
हास्य रस उस रस को कहते हैं जब हमें काव्य को देखकर उत्साहित्ता और विनोद का भाव उत्पन्न होता है उसको
हास्य रस कहते हैं।
साधारण शब्दों में बात करें तो अगर किसी काव्य को करने से उसमें उत्साहित और हंसी का भाव उत्पन्न होता है तथा काव्य पढ़ने में काफी रोचक लगता है तो उसको हिंदी व्याकरण में हास्य रस कहा जाता है और इस रस के अंदर भाव भी पाए जाते हैं जिससे हास्य रस और ज्यादा रोचक बन जाता है।
सरल शब्दों में हास्य रस स्थाई भाव है जब किसी भी व्यक्ति की स्थाई वेशभूषा और आकृति और को देखकर ह्रदय के अंदर विनोद और भाव उत्पन्न होता है उसे हास्य रस कहते हैं।
मतलब कह सकते हैं जब भी हमें किसी व्यक्ति को देखकर हंसी आती है या फिर हमारे मन में उसे व्यक्ति के लिए जो भाव आता है उसको हास्य रस कहते हैं यहां पर केवल मन में उत्साहित रहती है।
भरतमुनि के अनुसार दूसरों की चेष्टा से हास्य उत्पन्न होता है मतलब यहां पर कवि का कहना है कि जब हमें दूसरों की चेष्टा को देखकर हंसी या मुस्कान तथा आंखों में आंसू आते हैं तो उसको हास्य रस कहते हैं।
कवि पंडित राज ने कहा है कि जिसकी वाणी और अंगों के विकारों को देखने से मनुष्य का मन खिल उठता है उसको हास्य रस कहते हैं।
हास्य रस के प्रकार
हिंदी व्याकरण में हास्य रस दो प्रकार के होते हैं आत्मस्थ हास्य रस,परस्थ हास्य रस।
हास्य रस के तत्व
दोस्तों हास्य रस के अंदर पांच तत्व पाए जाते हैं और आपको पांचो तत्व के बारे में अच्छे से पता होना चाहिए अगर आपको इन तत्वों के बारे में नहीं पता है तो आप हास्य रस को आसानी से नहीं समझ पाएंगे।
स्थाई भाव
हास्य रस के अंदर सबसे पहले स्थाई भाव पाया जाता है जिसमें हास्य प्रधान रहता है।
आलंबन
इसके अंदर काव्य का आकार एवं चेष्टा और विकृत वेशभूषा को शामिल किया गया है हास्य रस में अवलंबन महत्वपूर्ण रहता है।
उद्दीपन का भाव
इसके अंदर अनोखा पहनावा और बातचीत क्रियाकलाप आदि चीज शामिल है जिससे काव्य रोचक बनता है।
अनुभव
हास्य रस में प्रधान तत्व अनुभव भी है इसमें हंसी और मुस्कान और आंखों की चहचहाट मतलब कह सकते है व्यक्ति के अनुभव को देखा जाता है कि उसे काव्य को पढ़कर कैसे हंसी आ रही है और उसका कैसा रिएक्शन है।
संचारी भाव
हास्य रस के अंदर संचारी भाव में उत्सुकता और आलसी कंपन जैसी चीजों को शामिल किया जाता है।
Hasya Ras Ka Udaharan – हास्य रस का उदाहरण
चलिए आप उदाहरण से हास्य रस के उदाहरण को अच्छे से समझते हैं और इसमें हर उदाहरण का क्या अर्थ है।
“बंदर ने कहा बंदरिया से, चलो नहाने चलें गंगा, बच्चों को छोड़ेंगे घर पे, वही करेंगे हुड़दंगा”
अब इस उदाहरण से पता चल रहा है कि बंदर बंदरिया के साथ मजाक कर रहा है और कह रहा है कि चलो गंगा में नहाने चलते हैं और बच्चों को घर पर ही छोड़ देंगे यह केवल एक मनोरंजन काव्य है इसमें लोगों को हंसाने के लिए हास्य रस शैली का इस्तेमाल किया गया है।
“मेरी दादी ने मुझे एक कहानी सुनाई थी, जिसे बाद में एक बिरहा के रूप में भी सुना”
इस काव्य में कहा गया है कि एक बालक की दादी ने उसे एक कहानी सुनाई थी उसने कहानी को केवल बिरहा के रूप में मतलब मनोरंजन के रूप में सुना।
“भुल्लू दर्जी अपनी भुलक्कड़पन के लिए पूरे गांव में मशहूर थे”
इस वाक्य में बताया गया है कि एक दर्जी अपने भुलक्कड़ बन के कारण पूरे गांव में महसूस था मतलब इसे लोगों ने केवल उत्साह के लिए इस्तेमाल किया है हास्य रस बता रहा है कि लोग एक व्यक्ति को अपने मनोरंजन के लिए भुलक्कड़ कह रहे।
“जब धूमधाम से जाती है जाती है किसी की बारात , सज धजने का मन करता है धक्का दे दूल्हे को बैठ जाऊं घोड़ी में”
आप यहां पर बताया गया है कि किसी व्यक्ति का किसी की बारात को देखकर सजना का मन करता है और घोड़ी में बैठने का मन करता है मतलब यहां पर हंसी के लिए यह वाक्य का इस्तेमाल किया गया है।
हास्य रस के 10 उदाहरण
1. हाथी जैली देह, गैड़े जैसी खाल
तरबूजे सी लौपडी, बरवूने से गाल
2. बुरे समय को देखकर गंजे तू क्यों रोय । किसी भी हालत में तेरा बाल न बाँका होय
3. हाँसे- हाँसे आजै दोली दुलह दिगम्बर को, पाहुली ने आतें हिमाचले के इछाह में। करें पद्माकर कुलाई यों कहै को कहा। बोर्ड लहाँ देखें सो होई नहाँ का सह में
4.सीस पर गंगा हंसे, भुजनि भुजंगा हंसै हास ही को दंगा भयो नंगा के विवाह में।
5.हाथी जैसा देह, गेंडे जैसी चाल।
तरबूज़े सी खोपड़ी, खरबूज़े से गाल
6.ऐशी वाणी बोलिए, ओम ऐसे से कर झडिएसमा
7.पति-पत्नी में हुआ झगड़ा। मारा बेलन पति हुआ लगड़ा
8. चोटी चूढ़ी पहाड़ पे मरने के वास्ते नीचे खड़े कपिल देव कैच लेने के वास्त
9. नाना वाहन नाला वैषा। विहसे रिख समान नि देखा मुखहीन, बिपुल मुख काडू।
10. हुरे समय को देख कर गर्ने तू क्यों रोग, किसी भी काम लेंश बाल न बोलत होथ।
दोस्तों इन 10 हास्य रस के उदाहरण से अब आपको हास्य रस की परिभाषा और करुण रस और हास्य रस में अंतर समझ में आ गया होगा।
निष्कर्ष
दोस्तों में आशा करता हूं करती हूं कि इस आर्टिकल से आपको हास्य रस की परिभाषा उदाहरण और उसका मतलब समझ में आ गया होगा साधारण शब्दों में कह सकते हैं जब भी आप किसी व्यक्ति को देखकर हंसते हैं या फिर आपके मन में सहित आती है उसको ही साधारण शब्दों में हास्य रस कहते हैं।
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