प्रयोगवाद की विशेषताएं – प्रयोगवाद की विशेषताओं के बारे में बहुत सारे लोगों का सवाल है और स्टूडेंट को इसकी विशेषता के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं है अगर आप भी Prayogvad Ki Visheshtaen के बारे में जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को विस्तार से पढ़िए यहां पर आपको प्रयोगवाद की परिभाषा और विशेषता की स्टेप बाय स्टेप जानकारी दी जाएगी।
प्रगतिवाद काव्य के बारे में आप लोगों ने जरूर कभी ना कभी सुना होगा और इससे कवियों ने नई कविताओं को भी जन्म दिया है प्रगतिवाद काव्य से ही प्रयोगवाद सामने आया है भारत में कवियों ने हमेशा काव्य में नए-नए प्रयास किए हैं और उनके नए प्रयास से आज हमारे सामने प्रयोगवाद है।
काव्य में हमेशा नए-नए प्रयोगों का इस्तेमाल किया जाता है और नए-नए कलात्मक प्रयोग से ही प्रयोगवादी कविता बनती है।
साधारण शब्दों में बात करें तो जब भी नई कविता नए समाज और मानव की नई प्रयोग और अभिव्यक्ति तथा नई शब्दावली से ही कविता में प्रयोगवाद का आया है।
प्रयोगवाद की विशेषताएं
प्रयोगवाद की विशेषताओं के बारे में हम चर्चा नीचे आर्टिकल स्टेप बाय स्टेप करने वाले हैं अगर आपको प्रयोगवाद की परिभाषा समझ में आ गई है तो आप आपको प्रयोगवाद की विशेषता भी समझ में आ जाएगी।
हिंदी में प्रयोगवाद का शब्द 1943 की कविता तार सप्तक में इस्तेमाल किया गया था और इसमें लगभग सात कवियों की कविता का संकलन किया गया है।
हम सभी जानते हैं कि भारत में बहुत बड़े-बड़े कवि का जन्म हुआ है और सब ने एक से बढ़कर एक कविता पब्लिश की है लेकिन प्रयोगवाद का सबसे पहले इस्तेमाल कवि अज्ञेय की कविता में ही देखने के लिए मिला है इसमें उन्होंने रामविलास शर्मा भारत भूषण और मुक्तिबोध तथा गिरिजा कुमार माथुर और प्रभाकर ,नेमीचंद और अज्ञेय की खुद की कविताओं का संकलन है।
अहंकारी व्यक्तिवाद
प्रयोगवाद की विशेषता में सबसे पहले अहंकारी व्यक्तिवाद आता है और इसमें कवियों ने अहंकारी शब्दों का इस्तेमाल किया है जिसमें व्यक्तिवाद और झुनझुनाहट देखने के लिए मिलता है और प्रयोगवादी कविता का यह केंद्र बिंदु रहा है।
नग्न यथार्थवाद
आप सभी ने प्रयोगवादी कवि के कविताओं में हमेशा अश्लीलता और नग्नता और अस्वस्थ जैसी चीजों को दिखाकर साहित्य में गंदगी दिखाई और इसलिए साथ यह साहित्य भारती जनता को पसंद नहीं आया क्योंकि इसमें पाठक के दिमाग को विकृत कर दिया था क्योंकि पूरे साहित्य में गंदगी देखने के लिए मिली थी।
बौद्धिकता
प्रयोगवाद की विशेषता में अति बौद्धिकता भी देखने के लिए मिली है और बताया गया है कि प्रयोगवादी कवि अत्यधिक बौद्धिक थे और इसलिए यह काव्य भी अत्यधिक बौद्धिक था इसलिए इसमें भारतीय संस्कृति चमरा गई और काव्य के अंदर व्यक्ति की हृदय की अवहेलना की गई है।
उपमानों की नवीनता
प्रयोगवाद की सबसे बड़ी विशेषता उपमानों की नवीनता मानी जाती है बताया जाता है कि प्रयोगवाद कवि ने पुराने अपमान और रूपक को छोड़कर नवीनतम समावेश का इस्तेमाल अपनी कविता में किया था।
निराशावाद
प्रयोगवादी कवि के कविता में हमेशा निराशा देखने के लिए मिली है बताया जाता है कि उनके काव्य में हमेशा जगत और जीवन के प्रति निराशा देखने के लिए मिली।
सामान्य विषय में सबसे ज्यादा महत्व
प्रयोगवादी की विशेषता में बताया गया है कि उनके कवि के काव्य में हमेशा सामान्य विषय का इस्तेमाल किया जाता था जैसे चाय का प्याला, चूड़ी टूटी, चीड़ की लकड़ी आदि का इस्तेमाल इन्होंने अपनी कविताओं में किया है मतलब कह सकते हैं कि भारत में सामान्य विषय जितने भी है उन सभी में प्रयोगवादी कवि ने काव्य लिखे हैं।
अलंकार छंद और विधान तथा भाषा का इस्तेमाल
प्रयोगवाद की सबसे बड़ी विशेषता हम यह कह सकते हैं कि इसमें अलंकार छंद और भाषा का सही तरीके से इस्तेमाल किया गया है उनके काव्य में रूपक अलंकार से लेकर अनुप्रास अलंकार देखने के लिए मिलता है और छंद से एकदम मुफ्त थे लेकिन इन्होंने हिंदी व्याकरण का काफी दुरुपयोग किया है।
प्रयोगवादी काव्य हमेशा खड़ी बोली और भाषा मुक्त था और उनकी भाषा में सबसे प्रमुख विज्ञान गणित और दर्शन तथा भूगोल के शब्दों का इस्तेमाल देखने के लिए मिलता है।
प्रगतिवादी काव्य की विशेषता क्या है?
प्रगतिवादी काव्य की सबसे बड़ी विशेषता अलंकार और छंद है उनके काव्य में नवीनता देखने के लिए मिलती है।
प्रयोगवादी काव्य की विशेषता क्या नहीं है mcq?
अति यथार्थवाद प्रयोगवादी काव्य की विशेषता नहीं मानी जाती है।
निष्कर्ष
प्रयोगवाद की विशेषता के बारे में अब आपको बहुत अच्छे से पता चल गया होगा और इसके लेखक के बारे में भी आपको जानकारी मिल गई होगी एग्जाम में हमेशा प्रयोगवाद के लेखक के बारे में बहुत पूछा जाता है।
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